मेरा नाम विकास गुप्ता है और मेरी मदर का…
यह समीक्षा जीना सीखो संस्था के लिए है, जिसका नेतृत्व डॉ. मनीष आचार्य जी करते हैं।"
मेरा नाम विकास गुप्ता है और मेरी मदर का नाम है आशा गुप्ता. इकहत्तर साल की हैं, बीस दिन पहले इनके यहाँ से ट्रीटमेंट के लिए शुरुआत की गई थी, और डॉक्टर ने कंसल्ट किया था, दवाइयाँ भी भेज दी थीं एक महीने की. लेकिन जैसे ही दवाइयाँ भेज दी, पैसे दे दिए, उसके बाद दूसरे दिन से फोन पर रिस्पॉन्सिबल बंद. मैडम का नाम है डॉक्टर शिखा. अगर पेशेंट को दवाई खाने के बाद कुछ साइड इफेक्ट होता तो इसके लिए बात करने के लिए कोई भी नहीं था. ऐनीवे, बात खतम हो गई. दस दिन बाद मैडम का रिप्लाई आया कि वो कैम्प में बिजी ठीक मानते डॉक्टर कैम्प में बिजी हो सकते हैं. उसके बाद मैंने बोला कि ये प्रॉब्लम है, भाई ये ठीक है, उन्होंने कहा कोई दिक्कत नहीं, चलती रहती है, प्रॉब्लम कोई दिक्कत नहीं. उसके बाद फिर वो बातचीत करना बंद हो गई. एक महीने की दवाई खतम होने से करीब दस दिन पहले मैंने ट्राय किया कि भाई दवाई और मंगानी है क्योंकि खत्म होने वाली है. आज दवाई खत्म हुए तीन दिन हो गए, मैं पंद्रह दिन से ट्राई कर रहा हूँ, बारह दिन हो गए. कहीं से कोई रिस्पॉन्स नहीं, इतने फोन कर चुका हूँ, इनके कंप्लेंट नंबर सब मेरे पास रिकॉर्डेड है. और सारे मेरे पास व्हाट्सएप मैसेज है. उनका कंप्लेंट नंबर, इनकी एक डॉक्टर और है दीक्षा, जिनका नंबर है 8-5-5-8-9-5-9-9-8, उनसे तीन दिन से बात हो रही है डॉक्टर शिखा ने एहसान किया था कोई, वो टाइम ही नहीं दे पा रही थी. उसके बाद जिनसे बात हुई, डॉक्टर ने बोला कि हाँ ठीक है दवाई लिख दी है. किसी का फोन नहीं आया दवाई के लिए. चार बार मैं फोन कर चुका हूँ, कल से और आज तक में कम से कम दस बार तो फोन कर चुका हूँ कंप्लेंट पर. वो बात कराते हैं, फिर कहते हैं आपको कॉलबैक आएगा, कहीं कॉलबैक नहीं आया. इतनी बुरी स्थिति है इस संस्था की, जिसकी वजह से नहीं है, बहुत परेशान करते हैं, बहुत ज़्यादा. और अगर किसी को बात करनी है मेरे से, एक-एक नंबर, एक-एक व्हाट्सएप मैसेज, एक-एक रिकॉर्डिंग मेरे पास है. बहुत ही घटिया रिव्यू है, अपने माँ-बाप को, अपने बुजुर्गों को, इस संस्था के पास न लेके जाएं. इससे अच्छा है कि उन्हें कहीं और जगह दिखा लें, वो ज़्यादा अच्छा है. बहुत ही घटिया
24 juli 2026
Review zonder uitnodiging